International Journal on Science and Technology

E-ISSN: 2229-7677     Impact Factor: 9.88

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भारत में परम्परागत जल संग्रहण पद्धतियाँः पुनरुद्धार की आवश्यकता

Author(s) डॉ. अनीता भट्ट
Country India
Abstract भारत में निरंतर रूप से जल की कमी प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में शहरी और ग्रामीण आबादी को प्रभावित कर रहा है। वर्ष 2018 में नीति आयोग द्वारा किये गए एक अध्ययन में 122 देशों के जल संकट की सूची में भारत 120वें स्थान पर खड़ा था। इस आलेख में भारत में उभरते जल संकट की चर्चा की गई है साथ ही इसको रोकने के लिए जल संरक्षण तकनीकों के परम्परागत ढांचे के पुनरुद्धार के महत्व और आवश्यकता का व्याख्यान किया गया है। लेख को निम्र श्रेणियों में रखा गया हैः वर्षा जल संग्रहण की मौजूदा विलुप्त हो रही संरचनाओं के पुनरुद्धार के लिए सरकार किस प्रकार आधुनिक तकनीक के प्रयोग द्वारा परम्परागत प्रज्ञता को पुनर्जीवित किया जा सकता है? इसके अनुरूप, लेख का प्रमुख शोध प्रश्र हैंः पिछले दशकों के संलेख के आधार पर जल संकट की समस्या को बेहतर ढंग से समझने के लिए योगदायी कारकों में प्रकाश डालना। यह शोध इस परिकल्पना पर आधारित है कि बढ़ती जनसंख्या की आपूर्ति हेतु और उपलब्ध जल संपदा की निरंतर घटते स्तर के परिणामस्वरूप भारत को आगामी दशकों में और अधिक गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता हैं। यह लेख जल के घटते स्तर के विषय में और जल प्रबंधन के लिए समुदाय द्वारा सक्रिय भागीदारी को उत्तरदायित्व के सद्दश से स्वीकार करते हुए एक जन आंदोलन के रूप प्रेरित करना हैं।
Keywords भारत, परम्परागत, जल संग्रहण, संसाधन, नीति आयोग, जलाशय, समुदाय
Published In Volume 12, Issue 1, January-March 2021
Published On 2021-01-07

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